Sectoral Fund

सेक्टोरल फंड क्या है? आसान और बातचीत वाली भाषा में पूरी जानकारी

अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो आपने सेक्टोरल फंड का नाम जरूर सुना होगा।
कई लोग कहते हैं — “अगर सेक्टर चल गया तो पैसा डबल भी हो सकता है।
और कुछ लोग चेतावनी देते हैं — “गलत समय पर घुसे तो बड़ा नुकसान भी हो सकता है।

तो सच क्या है?
आइए इसे आराम से, बातचीत वाली भाषा में समझते हैं।


सबसे पहले – सेक्टोरल फंड होता क्या है?

सीधी बात:
सेक्टोरल फंड एक ऐसा इक्विटी म्यूचुअल फंड है जो केवल एक खास सेक्टर में निवेश करता है।

जैसे:

  • बैंकिंग सेक्टर
  • आईटी सेक्टर
  • फार्मा सेक्टर
  • रियल एस्टेट
  • इंफ्रास्ट्रक्चर
  • एनर्जी

मतलब अगर आप बैंकिंग सेक्टोरल फंड लेते हैं, तो आपका ज्यादातर पैसा सिर्फ बैंकिंग और फाइनेंशियल कंपनियों में ही लगेगा।


इसमें खास बात क्या है?

देखो, सामान्य इक्विटी फंड अलग-अलग सेक्टर में पैसा लगाते हैं।
लेकिन सेक्टोरल फंड एक ही सेक्टरपर फोकस करता है।

मतलब:

👉 अगर वो सेक्टर तेज़ी से बढ़ा तो आपका फंड भी तेज़ी से बढ़ सकता है।
👉 अगर वो सेक्टर गिरा तो फंड भी बुरी तरह गिर सकता है।

यानी यहाँ दांव बड़ा होता है।


लोग इसमें निवेश क्यों करते हैं?

1. हाई ग्रोथ का मौका

अगर आपको लगता है कि आने वाले सालों में कोई खास सेक्टर तेज़ी से बढ़ेगा (जैसे IT या Pharma), तो आप उस सेक्टर में सीधा निवेश कर सकते हैं।

2. थीम पर भरोसा

कुछ लोग मानते हैं कि भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर या बैंकिंग का भविष्य मजबूत है, इसलिए वो उसी सेक्टर में फोकस करते हैं।


लेकिन जोखिम कितना है?

अब असली बात।

सेक्टोरल फंड में:

  • डायवर्सिफिकेशन कम होता है
  • उतार-चढ़ाव ज्यादा होता है
  • गलत समय पर एंट्री नुकसान दे सकती है
  • पूरा सेक्टर स्लो हो जाए तो फंड भी स्लो हो जाएगा

मतलब ये फंड “High Risk – High Reward” कैटेगरी में आता है।


कितने समय के लिए निवेश करना चाहिए?

अगर आप सेक्टोरल फंड में निवेश कर रहे हैं, तो:

👉 कम से कम 5 साल का नजरिया रखें
👉 और सेक्टर का साइकिल समझें

क्योंकि हर सेक्टर का अपना चक्रहोता है कभी तेज़ी, कभी मंदी।


किसके लिए सही है?

  • जो मार्केट और सेक्टर समझते हों
  • जो ज्यादा जोखिम उठा सकते हों
  • जिनका पोर्टफोलियो पहले से डायवर्सिफाइड हो
  • जो थीमैटिक या सेक्टर आधारित निवेश करना चाहते हों

किसके लिए सही नहीं?

  • नए निवेशक
  • जो स्थिर और संतुलित रिटर्न चाहते हैं
  • जो ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं झेल सकते
  • जो पूरा पैसा एक ही जगह लगाने की सोच रहे हों

एक आसान उदाहरण से समझिए

मान लीजिए शेयर मार्केट एक बड़ी थाली है।

  • मल्टीकैप फंड = पूरी थाली (सब कुछ थोड़ा-थोड़ा)
  • सेक्टोरल फंड = सिर्फ एक डिश

अगर वो डिश स्वादिष्ट निकली, तो मज़ा आ जाएगा।
लेकिन अगर वही डिश खराब निकली, तो पूरी प्लेट बेकार लगेगी।


कितना निवेश करना चाहिए?

सेक्टोरल फंड में कभी भी पूरा पैसा नहीं लगाना चाहिए।
इसे अपने पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा (जैसे 10–20%) रखना बेहतर होता है।


निष्कर्ष

सेक्टोरल फंड उन निवेशकों के लिए है जो किसी खास सेक्टर की ग्रोथ स्टोरी पर भरोसा करते हैं और ज्यादा जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं।

यह फंड बहुत अच्छा रिटर्न दे सकता है, लेकिन उतनी ही तेजी से गिर भी सकता है।

इसलिए इसमें निवेश सोच-समझकर और संतुलन के साथ करना चाहिए।

 

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